Tuesday, 21 April 2015

उड़ान



सूरज अगर हो डूब रहा,
दिन भी लगे ढलता हुआ,
नये सुबह का, याद रखना,
आह्वाहन बाकी है,
अभी मेरे पंखों में उड़ान बाकी है.

गुज़रते से जो लगे,
खुशनुमा लम्हों के वो सिलसिले,
दो आँसुओं के धार के बीच
भीनी सी एक मुस्कान बाकी है,
अभी मेरे पंखों में उड़ान बाकी है.

हार मिले रणक्षेत्र में,
ओझल हों लक्ष्य नेत्र से,
सपनों में मेरे आज भी
कुछ जान बाकी है,
अभी मेरे पंखों में उड़ान बाकी है.

माना धरती बंजर मेरे लिए,
यहाँ हर निःशवास खंजर मेरे लिए,
पर आज़माने को मेरे लिए
पूरा आसमान बाकी है,
अभी मेरे पंखों में उड़ान बाकी है.

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